Cockroach Janata Party Protest: उमाकांत त्रिपाठी।Cockroach Janata Party Protest एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी समर्थकों पर कथित लाठीचार्ज के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। बुधवार को एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच के सामने इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाने की अनुमति मांगी। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं है और उसके पास ऐसा करने का समय भी नहीं है। जब दूसरी बार वीडियो देखने का अनुरोध किया गया तो CJI ने कहा कि अदालत और अपना समय बर्बाद न करें।
यह मामला 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम से जुड़ा है, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा कि छात्र नीट परीक्षा में पारदर्शिता, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। उनका कहना था कि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की न्यायिक जांच आवश्यक है।
वकील ने अदालत को यह भी बताया कि पुलिस की कथित बर्बरता के वीडियो उपलब्ध हैं और छात्रों की स्थिति को देखते हुए मामले की सुनवाई जल्द की जानी चाहिए।
हालांकि- CJI सूर्यकांत ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत के पास वीडियो देखने का समय नहीं है। इसके साथ ही तत्काल सुनवाई की मांग भी अस्वीकार कर दी गई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी नहीं दी तत्काल राहत
इससे पहले मंगलवार को यही मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था। वहां भी याचिकाकर्ताओं ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस अनुरोध को अस्वीकार करते हुए कहा कि इस प्रकार के मामलों में अदालत को अनावश्यक रूप से न घसीटा जाए।
इस तरह लगातार दूसरे दिन दोनों प्रमुख अदालतों ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार किया।
संसद मार्च के दौरान क्या हुआ था?
20 जुलाई को Cockroach Janata Party Protest के बैनर तले हजारों छात्र और युवा संसद की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे NEET परीक्षा व्यवस्था में सुधार, NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा और शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाना चाहते थे।
मार्च के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी और छात्र घायल हुए।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के आरोप लगाए गए।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने छात्र प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज पर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने कहा कि यदि निर्दोष छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बार एसोसिएशन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है और यदि कहीं पुलिस की ओर से आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
कैसे बनी Cockroach Janata Party?
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत मई 2026 में सोशल मीडिया पर हुई थी। इसकी पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ी है।
दरअसल, एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि कुछ बेरोजगार युवा “कॉकरोच” की तरह हैं, जो बाद में सोशल मीडिया, मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर व्यवस्था पर हमला करने लगते हैं।
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया यूजर अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से अकाउंट बनाया। देखते ही देखते यह अकाउंट वायरल हो गया और लाखों लोग इससे जुड़ गए।
CJI ने बाद में दी थी सफाई
अपनी टिप्पणी पर विवाद बढ़ने के बाद CJI सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण भी दिया था। उन्होंने कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी उन लोगों के लिए थी जो कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध डिग्रियों के सहारे पेशे में प्रवेश कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सभी युवाओं या छात्रों पर टिप्पणी करना नहीं था।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट दोनों ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया है। हालांकि याचिका नियमित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध हो सकती है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों और छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग जारी रखी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।














