उमाकांत त्रिपाठी।CJP Government Meeting को लेकर शुक्रवार को राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक हुई। यह बैठक दोपहर 12:40 बजे से 2:20 बजे तक चली। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद रहे, जबकि CJP की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका ने भाग लिया। हालांकि बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से बातचीत का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है।
यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब देशभर में कथित पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन तेज हैं और सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से अब तक किए गए सुधारों और जांच की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी है। इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर पहली बैठक हुई थी, लेकिन वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी थी।
CJP Government Meeting में क्या हुई चर्चा?
शुक्रवार को हुई CJP Government Meeting को पेपर लीक विवाद और जारी आंदोलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक करीब 1 घंटे 40 मिनट तक चली। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका ने अपनी बात रखी।
हालांकि- बैठक खत्म होने के बाद किसी भी पक्ष ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन मुद्दों पर सहमति बनी या किन बिंदुओं पर बातचीत आगे बढ़ेगी। माना जा रहा है कि सरकार आंदोलन समाप्त कराने और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट
पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं। अदालत ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद सरकार ने अब तक कौन-कौन से सुधार किए हैं, इसकी पूरी जानकारी दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि मामले की जांच किस स्तर तक पहुंची है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। अदालत के इस रुख के बाद सरकार पर जवाबदेही का दबाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि- अदालत की टिप्पणियां आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
CJP ने सरकार पर दबाव बढ़ाने का दावा किया
बैठक से पहले CJP नेताओं ने दावा किया कि सरकार आंदोलन के दबाव में है। संगठन की ओर से कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देर रात वीडियो संदेश जारी करना पड़ा, जो इस बात का संकेत है कि सरकार अब इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
CJP का कहना है कि- जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने यह भी दोहराया कि उनकी मुख्य मांग पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार है।
पीएम मोदी ने कानून लाने की बात कही
गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून लाने की दिशा में काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि विपक्ष और आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि केवल कानून की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई भी जरूरी है।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, कई मेट्रो स्टेशन बंद
CJP के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने नई दिल्ली सहित 18 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया है।
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन के दौरान हजारों समर्थक वहां पहुंचे। CJP नेता अभिजीत दीपके ने समर्थकों के साथ राष्ट्रगान भी गाया।
प्रशासन का कहना है कि- सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए यह कदम उठाए गए हैं।
पिछले चार दिनों में क्या-क्या हुआ?
पेपर लीक आंदोलन लगातार नया मोड़ लेता रहा है।
- 20 जुलाई: CJP ने संसद मार्च निकाला, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई तथा लाठीचार्ज की घटना सामने आई।
- 21 जुलाई: अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि सरकार बातचीत चाहती है तो उसे स्वयं आगे आना चाहिए।
- 22 जुलाई: सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार भरोसा दिलाती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
- 23 जुलाई: CJP ने सरकार से जंतर-मंतर आकर बातचीत करने की मांग की।
- 24 जुलाई: कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोनों पक्षों के बीच दूसरी औपचारिक बैठक हुई।
जानिए- आगे क्या?
अब सभी की नजर सरकार और CJP के अगले कदम पर टिकी है। यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो प्रदर्शन और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी, सरकार की ओर से संभावित नए कानून की तैयारी और आंदोलनकारियों की मांगों के बीच आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।














