उमाकांत त्रिपाठी।PM Modi Instagram Advice शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक की सबसे चर्चित बात बन गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान अपने मंत्रियों से पूछा कि आखिर कितने मंत्री Instagram पर सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि आज का युवा सबसे अधिक इंस्टाग्राम पर मौजूद है, इसलिए सरकार के मंत्रियों को भी इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहना चाहिए। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को नियमित रूप से रील (Reels) पोस्ट करने और लोगों से सीधे जुड़ने की सलाह भी दी।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया अब केवल प्रचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं से संवाद स्थापित करने का सबसे प्रभावी प्लेटफॉर्म बन चुका है। उन्होंने सभी मंत्रियों से डिजिटल माध्यमों का बेहतर उपयोग करने और जनता के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर जोर दिया।
इसी कैबिनेट बैठक में सरकार ने पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा और फास्ट ट्रैक अदालतों से जुड़े संशोधन विधेयक के मसौदे को भी मंजूरी दी। यह फैसला देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और नीट यूजी पेपर लीक विवाद के बीच आया है।
क्यों दिया गया PM Modi Instagram Advice?
पिछले कुछ दिनों से देशभर में छात्रों के आंदोलन को सोशल मीडिया, विशेष रूप से Instagram, से काफी समर्थन मिला है। आंदोलन में शामिल छात्र लगातार रील और वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, जिन्हें देखकर दूसरे छात्र भी प्रदर्शन स्थलों तक पहुंच रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बदलते डिजिटल ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों से कहा कि आज का युवा इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा समय बिताता है। यदि सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और फैसलों की सही जानकारी युवाओं तक पहुंचानी है, तो सभी मंत्रियों को इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय होना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि- केवल पोस्ट डालना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना भी जरूरी है।
कैबिनेट बैठक में पेपर लीक कानून पर बड़ा फैसला
कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला पेपर लीक रोकने के लिए नए संशोधन विधेयक को लेकर लिया गया।
सरकार ने ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी है। प्रस्तावित कानून के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
मुख्य प्रावधान:
- पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन।
- दोषियों को जल्द सजा दिलाने की व्यवस्था।
- कड़ी सजा और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान।
- परीक्षा प्रणाली से जुड़े संगठित अपराधों पर सख्त कार्रवाई।
- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ त्वरित कानूनी प्रक्रिया।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों का विश्वास बहाल करना है।
पीएम मोदी का वीडियो संदेश और युवाओं को भरोसा
कैबिनेट बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी भी कीमत पर पेपर लीक जैसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि- दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही संसद के मौजूदा मानसून सत्र में इस संबंध में विधेयक लाने की भी जानकारी दी गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ेगी जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं।
छात्र आंदोलन और सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका
देशभर में नीट यूजी पेपर लीक को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं।
इन आंदोलनों में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, ने अहम भूमिका निभाई है। छात्र आंदोलन से जुड़े वीडियो, लाइव अपडेट और रील्स तेजी से वायरल हो रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शन स्थलों तक पहुंच रहे हैं और आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि- वर्तमान समय में सोशल मीडिया किसी भी जनआंदोलन को गति देने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। संभवतः यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक सक्रिय रहने की सलाह दी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार का रुख
नीट पेपर लीक मामले को लेकर कई छात्र संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
हालांकि- सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। सरकार का कहना है कि जनता ने सरकार को जनादेश दिया है और ऐसे समय में जिम्मेदारी से पीछे हटना उचित नहीं होगा।
सरकार के अनुसार, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना ही प्राथमिकता है। नए कानून के माध्यम से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।













