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Sonam Wangchuk Hunger Strike Ends: डील करनी होती तो क्या 26 दिन भूखा रहता… भूख हड़ताल तुड़वाने में कांग्रेस सांसद के रोल पर क्या बोले सोनम वांगचुक.!

Sonam Wangchuk Hunger Strike Ends देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। 27 दिनों तक चली भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात 10:53 बजे एक नया वीडियो संदेश जारी कर उन तमाम सवालों का जवाब दिया, जो उनके अनशन समाप्त करने के बाद सोशल मीडिया पर उठ रहे थे। उन्होंने कहा कि 26 दिन तक भूखा रहने के बाद उनका 11 किलो वजन कम हो चुका है और अब उनसे यह पूछा जा रहा है कि उन्होंने अनशन क्यों तोड़ा और क्या सरकार से कोई डील हुई थी।

वांगचुक ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उन्हें किसी तरह की डील ही करनी होती, तो वह 26 दिन तक भूखे क्यों रहते। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण छात्रों का भविष्य और आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों की सुरक्षा थी, न कि किसी पद या व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई।

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक?

अनशन समाप्त होने के एक दिन बाद जारी अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने भावुक अंदाज में कहा कि लगातार 26 दिनों तक भूखे रहने से उनका करीब 11 किलो वजन कम हो गया। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं।

उन्होंने कहा,

“क्या मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था? क्या मुझे यह साबित करना पड़ेगा कि मैंने किसके हाथों अनशन क्यों तोड़ा और क्या कोई डील हुई?”

वांगचुक ने कहा कि अगर सरकार से कोई समझौता करना ही उद्देश्य होता तो वह इतने लंबे समय तक अपनी जान जोखिम में डालकर भूख हड़ताल नहीं करते।

सरकार और वांगचुक के बीच कैसे बनी सहमति?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Sonam Wangchuk Hunger Strike Ends होने से पहले करीब तीन दिनों तक सरकार और वांगचुक के बीच बैक-चैनल बातचीत चलती रही। कई स्तरों पर बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस गतिरोध को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि तन्खा पहले भी वांगचुक के एक कानूनी मामले में सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रख चुके हैं और दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं।

इसके अलावा, लद्दाख के कुछ प्रमुख नेताओं ने भी मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जिससे बातचीत आगे बढ़ सकी और आखिरकार लिखित आश्वासन के बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

जेपी नड्डा ने जूस पिलाकर तुड़वाया अनशन

लगातार 27 दिनों तक चले अनशन के बाद गुरुवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पहुंचे।

जेपी नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इस दौरान सरकार की ओर से उन्हें एक लिखित आश्वासन पत्र भी सौंपा गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम भी मौजूद रही, जिसने पूरे अनशन के दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी।

सरकार से क्या मिला लिखित आश्वासन?

सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। इस दौरान उनकी प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सरकार की ओर से जिन बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया गया, उनमें शामिल हैं—

आंदोलन में शामिल छात्रों पर नए केस दर्ज नहीं किए जाएंगे।
परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने और पेपर लीक जैसे मामलों पर संसद में चर्चा कराई जाएगी।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया।

वांगचुक ने कहा कि इन्हीं लिखित आश्वासनों के आधार पर उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले?

अनशन समाप्त होने के बाद सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि उनके लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं था। उनकी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि आंदोलन में शामिल छात्रों पर कार्रवाई न हो और उनके भविष्य पर कोई संकट न आए।

उन्होंने कहा कि इस्तीफे की मांग पर आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।

65 सांसदों के समर्थन का भी किया जिक्र

अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या संदेश भेजकर भरोसा दिलाया कि वे संसद में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार का मुद्दा उठाएंगे।

उन्होंने इसे छात्रों की जीत बताते हुए कहा कि अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है और सरकार भी इसे गंभीरता से ले रही है।

 आगे की रणनीति क्या होगी?

वांगचुक ने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे। पहला, अनशन जारी रखकर अपनी जान को खतरे में डालना और दूसरा, अपनी जान बचाकर आगे भी छात्रों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखना।

उन्होंने कहा कि हजारों छात्रों, समर्थकों और शुभचिंतकों की अपील के बाद उन्होंने दूसरा रास्ता चुना। उनका मानना है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति से बड़ा होता है और इसे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखा जाएगा।

 

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