उमाकांत त्रिपाठी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में ताबड़तोड़ रैलियों के जरिए चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। अपने हालिया संबोधन में अमित शाह ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनती है, तो छह महीने के भीतर यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC लागू किया जाएगा।
अमित शाह ने अपने भाषण में तृणमूल कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि UCC कोई नया विचार नहीं है, बल्कि यह संविधान सभा की सिफारिश रही है, जिसे दशकों तक राजनीतिक कारणों से लागू नहीं किया गया। शाह ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अलग-अलग कानून होना तुष्टीकरण नहीं है, और क्या देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना गलत है?
बीजेपी के ‘संकल्प पत्र’ का जिक्र करते हुए उन्होंने दोहराया कि पार्टी सत्ता में आते ही समान नागरिक संहिता को लागू करेगी। शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी किसी के खान-पान या व्यक्तिगत जीवन में दखल देने की पक्षधर नहीं है, बल्कि समान अधिकार और कानून की बात करती है।
मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी अमित शाह ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी कोई वंशवादी पार्टी नहीं है और अगर पार्टी सत्ता में आती है तो बंगाल का ही एक स्थानीय नेता मुख्यमंत्री बनेगा। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि यह फैसला बंगाल के लोगों के हित में होगा।
हुमायूं कबीर को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी शाह ने प्रतिक्रिया दी और साफ कहा कि बीजेपी और ऐसे नेताओं के बीच कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए भ्रामक नैरेटिव तैयार किए जा रहे हैं।
चुनावी रैलियों और बड़े वादों के बीच बंगाल का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। अब सबकी नजर आने वाले मतदान और नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।














