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2 करोड़ में बनी हनुमान अंश ने कमाए 42 करोड़, फिल्म के साथ हो गया चमत्कार, टॉक्सिक हटाकर इसे स्क्रीन दी गईं

खबर इंडिया की।Hanuman Ansh Box Office:सिनेमाघरों में जब करोड़ों रुपये के बजट वाली फिल्मों का दबदबा हो, तब महज 2 करोड़ रुपये में बनी किसी फिल्म का दर्शकों की पहली पसंद बन जाना अपने आप में बड़ी खबर है। इन दिनों Hanuman Ansh Box Office को लेकर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। शुरुआत में जिस फिल्म को सीमित स्क्रीन्स मिली थीं, वह धीरे-धीरे दर्शकों के बीच ऐसी पकड़ बनाने में कामयाब हुई कि अब बड़े बजट की फिल्मों के मुकाबले इसकी मांग बढ़ती दिखाई दे रही है।

हाल ही में सिनेमाघर में खड़ी एक लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो देखकर लोगों को लगा कि शायद वह किसी बड़ी फिल्म की टिकट नहीं मिलने से परेशान होकर रो रही है। लेकिन जब उससे पूछा गया तो जवाब ने सभी को चौंका दिया। लड़की ने बताया कि वह ‘हनुमान अंश’ देखने आई थी, लेकिन उसे टिकट नहीं मिल पाई।

यहीं से इस फिल्म की सफलता की कहानी और दिलचस्प हो जाती है।

2 करोड़ बजट, लेकिन कमाई 42 करोड़ के पार

‘हनुमान अंश’ की सबसे खास बात इसका बजट और कलेक्शन है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म को करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया है और इसने करीब 42 करोड़ रुपये का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर लिया है।

यानी फिल्म ने अपने बजट के मुकाबले कई गुना ज्यादा कारोबार किया है। खास बात यह है कि फिल्म ने शुरुआत से ही जबरदस्त प्रदर्शन नहीं किया था। शुरुआती दो हफ्तों में इसकी कमाई बेहद सीमित रही और एक समय ऐसा भी आया जब माना जा रहा था कि फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों से हट सकती है।

लेकिन इसके बाद कहानी पूरी तरह बदल गई।

फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगी। लोगों ने सोशल मीडिया और आपसी बातचीत के जरिए इसके बारे में दूसरों को बताना शुरू किया। यही वर्ड ऑफ माउथ धीरे-धीरे फिल्म के लिए सबसे बड़ा प्रमोशन बन गया।

न बड़े स्टार, न करोड़ों का प्रमोशन

‘हनुमान अंश’ की सफलता इसलिए भी हैरान करती है क्योंकि इसमें किसी बड़े बॉलीवुड स्टार का नाम नहीं है। फिल्म के हीरो और डायरेक्टर को लेकर भी रिलीज से पहले वैसी चर्चा नहीं थी जैसी आमतौर पर बड़ी फिल्मों के साथ देखने को मिलती है।

फिल्म का कोई बहुत बड़ा प्रमोशनल कैंपेन भी नहीं हुआ। न ही बड़े-बड़े इवेंट्स और स्टार इंटरव्यू के जरिए इसे दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

फिल्म के फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर से जुड़ी जानकारी भी मुख्य रूप से फिल्म के सोशल मीडिया हैंडल के जरिए सामने आई।

इसके बावजूद दर्शकों ने फिल्म को खोज लिया।

ट्रेड एक्सपर्ट तरण आदर्श के मुताबिक, फिल्म की कमाई में वर्ड ऑफ माउथ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका कहना है कि अगर किसी फिल्म को नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो उसका असर शुरुआती दिनों में ही दिखाई देने लगता है। वहीं सकारात्मक रिव्यू और दर्शकों की प्रतिक्रिया फिल्म को आगे ले जा सकती है।

‘हनुमान अंश’ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

बड़ी फिल्मों के बीच कैसे बची ‘हनुमान अंश’?

फिल्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसकी स्क्रीन्स थीं। 7 अगस्त को रिलीज के समय इसे चुनिंदा सिनेमाघरों में जगह मिली। इसके बाद 14 अगस्त को ‘आवारापन 2’ और ‘बंटवारा 1947’ जैसी फिल्मों के आने के बाद इसकी स्क्रीन्स और कम हो गईं।

कमाई कमजोर होने के कारण कई सिनेमाघरों से फिल्म को हटाने की तैयारी भी होने लगी थी।

लेकिन मेकर्स ने हार नहीं मानी।

तरण आदर्श के अनुसार, फिल्म के प्रोड्यूसर्स ने डिस्ट्रीब्यूटर्स से अनुरोध किया कि किसी तरह फिल्म को तीसरे हफ्ते में भी चलाया जाए। उस समय डिस्ट्रीब्यूटर्स का मानना था कि ‘टॉक्सिक’ जैसी बड़ी फिल्म के आने के बाद इसे हटना ही पड़ेगा।

लेकिन फिल्म को कुछ स्क्रीन्स मिलती रहीं और दर्शकों की प्रतिक्रिया बेहतर होती गई। इसके बाद सिनेमाघरों ने भी इसकी मांग को देखते हुए फिल्म को जगह देना शुरू किया।

यही वजह है कि अब स्थिति उलटती दिखाई दे रही है। जहां शुरुआती दौर में फिल्म को सीमित स्क्रीन्स मिल रही थीं, वहीं दर्शकों की मांग के कारण कई जगह इसे आगे भी दिखाया जा रहा है।

50 साल पहले ‘जय संतोषी मां’ ने भी दिखाई थी ऐसी ताकत

‘हनुमान अंश’ की कहानी हमें 50 साल पुराने एक ऐसे ही बॉक्स ऑफिस उदाहरण की याद दिलाती है।

15 अगस्त 1975 को Sholay रिलीज हुई थी। अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारों, रमेश सिप्पी के निर्देशन और बड़े बजट की वजह से फिल्म को लेकर जबरदस्त माहौल था।

इसी दौरान महज करीब 25 लाख रुपये के बजट में बनी धार्मिक फिल्म Jai Santoshi Maa भी रिलीज हुई।

फिल्म में उस दौर के बड़े स्टार नहीं थे, लेकिन दर्शकों ने इसे जबरदस्त तरीके से स्वीकार किया। फिल्म ने करीब 5 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कारोबार किया और कई जगहों पर इसकी लोकप्रियता का असर ‘शोले’ की स्क्रीनिंग पर भी देखने को मिला।

दर्शक धार्मिक आस्था के साथ फिल्म देखने पहुंचे। कई जगहों पर लोग सिनेमाघरों में चप्पल उतारकर जाते और स्क्रीन की आरती तक करते थे।

यानी 50 साल पहले भी एक छोटी बजट की फिल्म ने स्टार पावर और बड़े बजट के सामने अपनी अलग जगह बनाई थी।

आखिर ‘हनुमान अंश’ की सफलता का राज क्या है?

इस पूरी कहानी से सबसे बड़ा सबक यही निकलता है कि बड़ा बजट हमेशा बड़ी सफलता की गारंटी नहीं होता।

आज फिल्मों के प्रमोशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। बड़े सितारों के इंटरव्यू, सोशल मीडिया कैंपेन, ट्रेलर लॉन्च और बड़े-बड़े इवेंट्स के जरिए फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाया जाता है।

लेकिन आखिरकार सिनेमाघर में दर्शक फिल्म के कंटेंट के लिए पैसा खर्च करता है।

‘हनुमान अंश’ के मामले में शुरुआत भले धीमी रही हो, लेकिन सकारात्मक दर्शक प्रतिक्रिया ने फिल्म को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। जब एक दर्शक दूसरे को फिल्म देखने की सलाह देता है, तो यह किसी भी बड़े विज्ञापन अभियान से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है।

यही वर्ड ऑफ माउथ फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बना।

और शायद यही वजह है कि आज ‘हनुमान अंश’ सिर्फ एक छोटी बजट की फिल्म नहीं, बल्कि बॉलीवुड के लिए एक बड़ा सवाल बनकर सामने आई है—क्या अब दर्शक स्टार और बजट से ज्यादा कंटेंट को महत्व दे रहे हैं?

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