उमाकांत त्रिपाठी।अमेरिका ने हाल के दिनों भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का एलान किया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अगर कोई देश रूस से तेल खरीदता है, तो उसको कड़े टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समय पूरी दुनिया में टैरिफ युद्ध छेड़ दिया है।इस बीच दुनिया के 20 देशों के दिग्गज एक मंच पर जुटेंगे। जिसमें पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लोदिमीर पुतिन इत्यादि शामिल हैं। चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान ये सभी एक साथ होंगे। इन दिग्गजों के एक साथ आने के बाद जाहिर है ट्रंप की नींद उड़ जाएगी।
पीएम मोदी लेंगे SCO समिट में हिस्सा
चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने बताया कि है कि एससीओ बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और अन्य देश के कई दिग्गज शामिल होंगे ये आयोजन चीन के तियानजिन शहर में होगा। बता दें कि दो दिवसीय इस समिट में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और नौ अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी हिस्सा लेंगे।
संयुक्त घोषणा पत्र पर होगा हस्ताक्षर
एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन के दौरान एससीओ के सभी देश एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। वहीं, इसके अतिरिक्त सभी सदस्य देश एससीओ विकास रणनीतिक को मंजूरी देंगे, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि इस घोषणा पत्र में अमेरिका की टैरिफ नीति को करारा जवाब दिया जा सकता है।
पीएम मोदी की उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण: चीन
आपको बता दें कि- भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने गुरुवार को कहा कि इस महीने अंत में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी की चीन यात्रा शिखर सम्मेलन और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि चीन पीएम मोदी की इस यात्रा को बेहद महत्व देता है। उन्होंने कहा कि पीएम की चीन यात्रा न केवल एससीओ बल्कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण घटना होने वाली है। चीन और भारत का एक कार्य समूह इस यात्रा को सफल बनाने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिका को घेरने में लगा चीन
इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से चीन अमेरिका को शक्ति प्रदर्शन दिखाने की कोशिश करेगा। इससे पहले चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने एससीओ की बैठक को एक खास देश के चरित्र से अलग करार दिया। उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिका को लेकर कहा कि- कुछ देश अपने राष्ट्रीय हित को दूसरों के हित ऊपर रखना चाहते हैं।इससे साफ होता है कि उन्होंने अमेरिका की ओर इशारा किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ही दुनिया भर में टैरिफ युद्ध छेड़े हुए हैं। लियू ने दावा किया कि एससीओ की सिद्धांत एक की जीत में दूसरे की हार जैसी पुरानी अवधारणाओं से काफी अलग है। उन्होंने कहा कि समय के साथ यह संगठन और भी मजबूत हुआ है।













