उमाकांत त्रिपाठी।India-China Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए चीन की यात्रा कर सकते हैं. उनकी यह यात्रा वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान की यात्रा के साथ होगी. यदि यह यात्रा होती है तो यह 2018 के बाद और पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2024 में कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी.अक्टूबर 2019 के बाद से उनकी पहली सुनियोजित बैठक भी भारत और चीन द्वारा अपनी विवादित सीमा पर गश्त करने के समझौते पर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद हुई थी. शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन 10 देशों का यूरेशियन सुरक्षा और राजनीतिक समूह है. चीन, रूस, भारत, ईरान,
अक्टूबर 2024 में कजान में मिले थे मोदी- जिनपिंग
अक्टूबर 2024 की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए. बैठक में उन्होंने कहा, “यह पांच वर्षों के बाद हमारी पहली औपचारिक बैठक है. हम सीमा पर हुए समझौतों का स्वागत करते हैं. सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे संबंधों का आधार बने रहने चाहिए. मुझे विश्वास है कि हम खुले दिल से बातचीत करेंगे और हमारी चर्चाएं रचनात्मक होंगी.” इस बीच शी जिनपिंग ने कहा कि- भारत और चीन के लिए अधिक संवाद और सहयोग करना मतभेदों और असहमतियों को उचित ढंग से संभालना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाएं तथा विकासशील देशों की ताकत और एकता को बढ़ावा देने के लिए एक उदाहरण स्थापित करें.
जून में बनी थी वार्ता के लिए सहमति
इस वर्ष जून माह के प्रारंभ में,भारत और चीन ने ट्रेड और इकनॉमिक्स के क्षेत्र में चिंता के विशिष्ट मुद्दों को हल करने के लिए वार्ता करने पर सहमति व्यक्त की थी. क्योंकि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के लद्दाख क्षेत्र में सैन्य गतिरोध की समाप्ति के बाद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्माण करने के लिए काम कर रहे थे. यह निर्णय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद लिया गया. दोनों पक्षों ने सीधी हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने के प्रयासों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की, जो 2020 से निलंबित हैं.
जानें- इस वर्ष कैसे रहे भारत-चीन संबंध
जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक की संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. क्योंकि इसमें आतंकवाद से संबंधित चिंताओं का उल्लेख नहीं किया गया था. एचटी की रिपोर्ट के अनुसार राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में बैठक में भाग लिया, लेकिन उन्होंने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए. क्योंकि इसमें 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख नहीं था. लेकिन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस अपहरण का उल्लेख था. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के साथ चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान का पुरजोर समर्थन किया था.












