स्वास्थ्य

वर्ल्ड हेल्थ डे आज: पीएम मोदी ने जताई मोटापे पर चिंता, आरोग्यं परमं भाग्यं का मतलब भी समझाया.!

उमाकांत त्रिपाठी।विश्व स्वास्थ्य दिवस पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वस्थ जीवन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि- स्वास्थ्य ही ‘सबसे बड़ा भाग्य और धन’ है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि- सरकार एक स्वस्थ दुनिया बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित रखेगी और लोगों के कल्याण के लिए निवेश करती रहेगी।पीएम मोदी ने X पर पोस्ट में कहा,कि- विश्व स्वास्थ्य दिवस पर, आइए हम एक स्वस्थ दुनिया बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं। हमारी सरकार स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित रखेगी और लोगों के कल्याण के अलग-अलग पहलुओं में निवेश करती रहेगी। अच्छा स्वास्थ्य हर संपन्न समाज की नींव है।

पीएम ने ऑयल का उपयोग कम करने की सलाह दी
प्रधानमंत्री ने इस दौरान एक वीडियो भी शेयर किया। इसमें उन्होंने मोटापे की समस्या पर बात की। उन्होंने लोगों से खाना पकाने के तेल का इस्तेमाल 10 प्रतिशत तक कम करने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने ‘आरोग्यं परमं भाग्यं’ का उल्लेख किया।

पीएम ने जताई बीमारियों पर चिंता
पीएम मोदी ने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर चिंता जताई। उन्होंने खासतौर पर मोटापे की समस्या का जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक 44 करोड़ से ज्यादा भारतीय मोटापे से पीड़ित होंगे। पीएम मोदी ने कहा,’आरोग्यं परमं भाग्यं’ का मतलब है। आरोग्य ही परम भाग्य, परम धन है। बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर भविष्य बनाने का रास्ता है।

44 करोड़ से ज्यादा लोग होंगे मोटे
आपकों बता दें कि- आजकल हमारी जीवनशैली हमारे स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रही है। हाल ही में मोटापे पर एक रिपोर्ट आई, जिसमें कहा गया है कि 2050 तक 44 करोड़ से ज्यादा लोग मोटापे से पीड़ित होंगे।

स्वास्थ्य सुविधाएं हो रहीं है बेहतर
आपकों बता दें कि- विश्व स्वास्थ्य दिवस 2025 पर, WHO की थीम ‘स्वस्थ शुरुआत, आशाजनक भविष्य’ है। भारत आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बना रहा है। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद मिली है।

WHO ने 1950 में की थी शुरुआत
दरअसल, विश्व स्वास्थ्य दिवस हर साल 7 अप्रैल को मनाया जाता है। यह वैश्विक स्वास्थ्य के महत्व को बताता है। यह स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान करता है। इसकी शुरुआत 1950 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने की थी। हर साल, यह सरकारों, संस्थानों और समुदायों को स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी बातों पर ध्यान देने के लिए एक साथ लाता है।

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