उमाकांत त्रिपाठी।No Safe Limit of Drinking: कई लोगों को शराब की बहुत ही ज्यादा बुरी लत होती है, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो कम अमाउंट में ड्रिंक करते हैं, मसलन- हफ्ते में एक बार, पार्टी या कभी-कभार पुराने दोस्तों के साथ. अगर आप आदतन शराबी नहीं भी हैं फिर भी खुद को खतरे से बाहर नहीं समझें, क्योंकि शराब भी बड़ा नुकसान कर सकती है.
कम शराब भी है खतरनाक
23 सितंबर, 2025 को बीएमजे एविडेंस-बेस्ड मेडिसिन में छपी एक रीसेंट स्टडी ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि हकल शराब पीने का सेहत पर कोई नुकसान नहीं होता है. असल में, ये न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग, डिमेंशिया (Dementia) के लिए एक रिस्क फैक्टर्स के तौर पर काम कर सकता है.
शराब पीने की कोई सेफ लिमिट नहीं है
अक्सर कहा जाता है कि- अगर किसी चीज का सेवन कम मात्रा में किया जाए, तो उसके असर बहुत ज्यादा खतरनाक नहीं होता. यही बात शराब के मामले में भी अक्सर कही जाती है. लेकिन पिछली स्टडीज में हल्के अल्कोहल के सेवन से देखे गए प्रोटेक्टिव इफेक्ट्स असल में झूठे थे, क्योंकि जिन लोगों को बाद में डिमेंशिया हुआ, उन्होंने डायग्नोसिस से पहले के सालों में असल में कम शराब पी थी, इसलिए ये पहले से स्थापित फाइंडिंग्स को चुनौती देता है.
डिमेंशिया का रिस्क
रिसर्चर्स ने एक बड़ी स्टडी की, जिसमें 5 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा के साथ-साथ बीस लाख से ज्यादा लोगों के जेनेटिक इंफॉर्मेशन भी शामिल थे. दूसरे शब्दों में, ये स्टडी बहुत एक्सटेंसिव थी. फाइंडिंग्स से पता चला कि किसी भी तरह का अल्कोहल का सेवन असल में डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ाता है. इसके अलावा, जेनेटिकली डिस्पोस्ड लोगों में डिमेंशिया डेवलप होने की संभावना 15 से 16 फीसदी ज्यादा होती है. यहां जेनेटिक रिस्क का अमतलब है शराब सेवन डिसऑर्डर को लेकर जेनेटिकली सेंसेटिव होना.
आपको क्या सीखना चाहिए?
रिसर्च के जरिए ये बताने की कोशिश की गई है कम अमाउंट में भी अगर शराब पी जाए, तो ये लॉन्ग रन में हमारे ब्रेन को डैमेज कर सकती है, जिससे आपको जिंदगी में आगे चलकर डिमेंशिया होने का खतरा होता है. रिसर्चर्स ने गुजारिश की है कि पब्लिक हेल्थ एडवाइस में इस बात को शामिल नहीं करना चाहिए कि कम शराब हार्मलेस या सेफ है, क्योंकि इससे भी खतरा हो सकता है. खासकर मिडिल एड लोगों को कॉगनिटिव डिकलाइन का रिस्क बढ़ जाता है. इसलिए बेहतर है कि आप शराब से पूरी तरह तौबा कर लें.














