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अमेरिकी सैनिकों ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान क्यों पहने थे पीले रंग के ग्लव्स? बेहद रोचक है कहानी

विश्व युद्ध मानवता और इस धरती पर लगा ऐसा दाग है जो सदियों तक हर देश के इतिहास का हिस्सा बना रहेगा. जब दुनिया के नेता अलग-अलग भागों में विभाजित होकर लड़ने-मरने को तैयार हो गए तो उनकी इस रणनीति को अमल किया लाखों सैनिकों ने जिन्होंने अपने नेताओं की रणनीति के खातिर अपनी जान गंवा दी. पहले और दूसरे विश्व युद्ध में कई अनोखी घटनाएं घटीं मगर आज हम उनमें से एक का जिक्र यहां कर रहे हैं. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी पैराट्रूपर्स ने पीले रंग के दस्ताने (American soldiers yellow gloves in World War 2) पहने थे. आज हम आपको उनके इन दस्तानों के पीछे की कहानी बताने जा रहे हैं.

आपने अक्सर देखा होगा कि सैनिकों की यूनिफॉर्म अक्सर ऐसी होती है जिससे छलावरण पैदा हो और छुपना आसान हो जाए मगर पीले रंग के ग्लव्स छुपने के लिए तो बिल्कुल भी नहीं बने हैं. तब अमेरिकी सैनिकों ने ऐसा दस्ताने क्यों पहने? (Yellow Gloves in World War 2 reason) पहले आपको बता देते हैं कि पैराट्रूपर्स (American paratroopers yellow gloves) क्या होते हैं. ये सेना की वो टुकड़ी होती है जो युद्ध में हवा से युद्ध छेत्र में उतरती है. यानी ये सैनिक प्लेन के जरिए जमीन पर लड़े जाने युद्ध में शामिल होते हैं. वो पैराशूट के जरिए जमीन पर उतरते हैं और आतंक मचाने लगते हैं.

दूसरे विश्व युद्ध में पड़ गई दस्तानों की कमी
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पैराट्रूपर्स ने युद्ध का रूप ही बदल दिया था. उन्होंने ऐसी तबाही मचाई थी कि कोई सोच ही नहीं सकता. अमेरिका ने भी ऐसा ही किया मगर एक समस्या खड़ी हो गई. रिपोर्ट्स के अनुसार पैराट्रूपर्स की यूनिफॉर्म बेहद खास होती थी. उन्हें अपने बदन पर राइफल, पैराशूट, खाने की चीज, गोलियां, जैसी कई चीजें लादनी पड़ती थी. ऐसे में जब वो जमीन पर गिरते थे तो शरीर के जो अंग खुले होते थे उनके छिलने-कटने का डर होता था. इनमें हाथ सबसे ज्यादा एक्सपोज होते हैं. ऐसे में उन्हें मोटो ग्लव्स दिए जाने थे. मगर अमेरिका में पैराट्रूपर्स के लिए मोटे ग्लव्स की कमी हो गई. वो इसलिए क्योंकि अमेरिका में सेना के सामान बनाने की कंपनी को लगा ही नहीं था कि अमेरिका इतनी जल्दी दोबारा वर्ल्ड वॉर का हिस्सा बन जाएगा. इसलिए वो ज्यादा मात्रा में दस्ताने नहीं बना रहे थे. सेना की मांग को पूरा करने के लिए दिमाग लगाया गया और वर्ल्ड वॉर 1 के बचे हुए ग्लव्स को काम में लाया गया.

इस वजह से हुआ था पीले दस्तानों का इस्तेमाल
पहले विश्व युद्ध के दौरान लड़ाई ज्यादातर घोड़ों पर बैठकर लड़ी जाती थी. घोड़ों की रस्सी पकड़ने के लिए जानवर की चमड़ी से दस्ताने बनाए जाते थे जिन्हें ज्यादा चिकना नहीं किया जाता था. ऐसे में ये दस्ताने हाथों की अच्छे से रक्षा करते थे. मगर इनका रंग पीला होता था क्योंकि ये पूरी तरह से रॉ होते थे. कमी को पूरा करने के लिए पहले विश्व युद्ध में इस्तेमाल किए दस्तानों का प्रयोग किया गया. उन्हें पैराट्रूपर्स को दिया गया जिससे उनके हाथ रस्सी, पत्थर गर्म बंदूक आदि से खराब ना हों. यही वजह है कि उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में पीले दस्ताने इस्तेमाल किए थे.

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