दिल्ली

तिहाड़ से बाहर आने के लिए केजरीवाल को करना होगा इंतजा, सुप्रीम कोर्ट में फिर टली सुनवाई!

उमाकांत त्रिपाठी।सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई 26 जून तक के लिए टाल दी है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अभी फैसला नहीं सुनाया है, इसलिए उसके पहले कोई आदेश देना सही नहीं होगा। थोड़ा इंतजार करना चाहिए।

कोर्ट में केजरीवाल की ओर से अभिषेकसिंघवी और विक्रम चौधरी हुए पेश
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि हम 24-25 जून तक फैसला सुनाएंगे। तब तक जमानत पर रोक रहेगी। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
इस पर आज सुनवाई करते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखना असमान्य बात है। आमतौर पर स्टे की याचिका में फैसला उसी समय सुनाया जाता है।कोर्ट में केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी और विक्रम चौधरी पेश हुए। वहीं, ED की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने दलीलें दी।

विक्रम चौधरी: निचली अदालत के बेल ऑर्डर अपलोड होने से पहले ही ED ने रोक की याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी। हाईकोर्ट ने उसी दिन इसे अर्जेंट सुनवाई के लिए कैसे लिस्ट किया?
विक्रम चौधरी: सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी। तब SC ने माना था कि केजरीवाल के खिलाफ कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। वे सोसाइटी के लिए खतरा नहीं है।
अभिषेक सिंघवी: सुप्रीम कोर्ट ने पहले कई आदेश दिए हैं, जिसमें कहा गया है कि एक बार अगर बेल दे दी जाती है, तो उसपर बिना किसी खास वजह के स्टे नहीं लगाया जा सकता है।
ASG राजू: जब ऑर्डर विकृत होता है तो स्टे लगाया जा सकता है।जस्टिस मिश्रा: क्या बेल ऑर्डर में पीएमएलए में जमानत की दोनों शर्तों का उल्लेख था?
ASG राजू: नहीं।
SG तुषार मेहता: हाईकोर्ट के वेकेशन बेंच ने यह मामला सुना था। कोर्ट को केस के पूरे रिकॉर्ड पढ़ने थे। केस की पूरी फाइल पढ़े बिना ऑर्डर कैसे पास किया जा सकता था।
जस्टिस मिश्रा: सिंघवी जी, हम अगले हफ्ते की डेट फिक्स करते हैं। हाईकोर्ट का फैसला आने देते हैं।
अभिषेक सिंघवी: हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को देखे बिना ही स्टे लगा दिया था, आप भी हाईकोर्ट के फैसले से पहले ही उस पर स्टे लगा दीजिए।
जस्टिस मिश्रा: हाईकोर्ट ने अगर गलती की है तो क्या हम भी गलती करें? मामले को 26 जुलाई को सुनेंगे। अभी कोई ओपिनियन नहीं देना चाहिए।SG तुषार मेहता: क्या माले को 27 जुलाई के लिए लिस्ट कर सकते हैं ?
विक्रम चौधरी: क्या कल (25 जुलाई) के लिए लिस्ट नहीं कर सकते?
SG तुषार मेहता: हाईकोर्ट पर दबाव नहीं डालना चाहिए। ये कोई बहुत बड़ा मामला नहीं है।
जस्टिस मिश्रा: हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित रखना समान्य बात नहीं है। हम इसे 26 को ही सुनेंगे।

लोअर कोर्ट बोला
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 20 जून को शाम 8 बजे अरविंद केजरीवाल को जमानत दे दी थी। जज न्याय बिंदु की बेंच ने कहा था कि ED के पास अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कोई सीधे सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने केजरीवाल को 1 लाख के बेल बॉन्ड पर जमानत दे दी थी।

 

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