महाराष्ट्र

अचानक अमित शाह से मिलने पहुंचे एकनाथ शिंदे, निधि आवंटन को लेकर हुई चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात

उमाकांत त्रिपाठी।महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सबकुछ ठीक नहीं है. डिप्टी सीएम एकनाथ की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के बीच अंदरखाने के मतभेद अब उभरकर सामने आने लगे हैं. शनिवार को पुणे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच हुई एक अहम बैठक चर्चा में आ गई है. इस बैठक को महाराष्ट्र की महायुति सरकार में फंड आवंटन को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे ने केंद्रीय गृह मंत्री शाह के साथ इस बैठक में वित्त विभाग से संबंधित फाइलों की मंजूरी में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई है. दरअसल, वित्त विभाग उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पास है. शिंदे ने कहा, शिवसेना के मंत्रियों और विधायकों की विकास योजनाओं की फाइलें लंबे समय तक अटकी रहती हैं, जिससे जरूरी प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं.

शिंदे ने उठाया वेतन भुगतान का मुद्दा?
उन्होंने महायुति के सहयोगियों के बीच ‘समानता और पारदर्शिता’ की बात दोहराई और कहा,कि- फंड वितरण और फाइल मंजूरी में निष्पक्षता होनी चाहिए. शिंदे ने महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल (MSRTC) के कर्मचारियों के वेतन भुगतान में आई हालिया अड़चन का भी जिक्र किया. यह मामला तब सुलझा, जब खुद शिंदे ने हस्तक्षेप किया और वित्त सचिव से बात की. दरअसल, शिवसेना के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अधीन महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के कर्मचारियों के वेतन में फंडिंग संबंधी मुद्दों के कारण देरी हो रही थी. इस मामले को शिंदे द्वारा वित्त सचिव के साथ सीधे हस्तक्षेप के बाद सुलझाया गया था.

 

अजित पवार ने खारिज किए आरोप
हालांकि, वित्त मंत्री अजित पवार ने सतारा में पत्रकारों से बातचीत में इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा,कि- अमित शाह से ऐसी कोई शिकायत मेरे पास नहीं आई है. पवार ने आगे स्पष्ट किया, अगर एकनाथ शिंदे को कोई आपत्ति होती तो वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस या मुझसे सीधे बात करते. हमारे आपसी संबंध बहुत मजबूत हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सभी को अटकलों के बजाय फैक्ट पर ध्यान देना चाहिए.

महाराष्ट्र में पावर बैलेंस भी…
इससे पहले महाराष्ट्र में पावर बैलेंस से जुड़ा एक आदेश सामने आया था. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीन प्रमुख दलों के बीच पावर पॉलिटिक्स में संतुलन बनाए रखने के लिए अधिकारों का समान वितरण सुनिश्चित किया था. 18 मार्च, 2025 को मुख्य सचिव सुजाता सौनिक ने एक आदेश जारी किया था. इस आदेश में कहा गया है कि- वित्त और योजना विभाग (वर्तमान में अजित पवार के अधीन) की हर फाइल अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से होकर गुजरेगी और फिर अंतिम मंजूरी के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस के पास भेजी जाएगी. इस कदम को सियासी संतुलन बनाए रखने के तौर पर देखा जा रहा है.

इससे पहले महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान जब उद्धव ठाकरे सीएम थे और अजित पवार के पास वित्त विभाग था. तब शिंदे के शिवसेना गुट ने अजित पवार पर पक्षपात का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया था कि पहले एनसीपी, फिर कांग्रेस और अंत में शिवसेना को पैसा आवंटित किया जाता है, जो एमवीए के पतन का एक प्रमुख कारण बन गया था.

संजय राउत ने महायुति सरकार पर कसा तंज
इस बीच, शिवसेना (उद्धव सेना) के नेता संजय राउत ने महायुति में मचे घमासान पर तंज कसा है. राउत ने कहा कि ऐसा होना तय है. एक दिन कैबिनेट में दंगा होने वाला है. खून-खराबा होने वाला है. महाराष्ट्र के पैसों को लेकर कैबिनेट में लड़ाई होगी. बस इंतजार कीजिए और देखिए.

 

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