मध्य प्रदेश

पीएम मोदी ने मन की बात में किया यूनेस्को में शामिल चराइदेव मोइदाम का जिक्र, इसी जगह पूर्वजों के शव रखते थे लोग, जानें क्या है चराइदेव?

उमाकांत त्रिपाठी। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो प्रोग्राम मन की बात के 112वें एपिसोड का प्रसारण हुआ। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने असम के अहोम राजवंश, चराइदेव मोइदाम, अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलंपियाड समेत कई मुद्दों पर बात की।

पीएम ने की चराइदेव मोइदाम पर बात
मन की बात में पीएम मोदी ने असम के अहोम राजवंश का जिक्र करते हुए एक बड़ी खुशखबरी दी। पीएम ने 46वीं विश्व धरोहर समिति की बैठक में चराइदेव मोइदाम -अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली को सांस्कृतिक संपत्ति में शामिल करने की घोषणा की गई। आपको बता दें कि ये 43वीं विश्व विरासत है जिसे यूनेस्को ने भारत के विरासत स्थल में शामिल किया है।

क्या होता है चराइदेव?
आपको बता दें कि यूनेस्को में शामिल होने वाला ये देश के उत्तर पूर्व का पहला स्थल होगा। चराइदेव का मतलब है ‘एक चमकता हुआ शहर”। ये असम के अहोम राजवंश की पहली राजधानी थी। अहोम राजवंश के लोग पारंपरिक रूप से अपने पूर्वजों के शव और उनके कीमती सामान मोइदाम में रखते थे। मोइदाम एक पहाड़ी जैसी संरचना है जो ऊपर से मिट्टी से ढंकी होती है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि- ये अहोम साम्राज्य के दिवंगत राजाओं और गणमान्य व्यक्तियों के सम्मान का प्रतीक है।

13वीं सदी से 19वीं सदी तक चला सम्राज्य
चराइदेव पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है। इस स्थान पर सामुदायिक पूजा भी की जाती थी। आपको बता दें कि अहोम राजवंश की शुरूआत 13वीं सदी में हुई थी और ये सम्राज्य 19वीं सदी की शुरुआत तक चला। मन की बात में पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलंपियाड के प्रतिभागियों से बातचीत करते हुए उनकी सराहना भी की।

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