Dharmendra Pradhan Resignation:उमाकांत त्रिपाठी।Dharmendra Pradhan Resignation की खबर सामने आते ही राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और संगठनों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों ने “छात्र एकता जिंदाबाद” के नारे लगाए और कथित तौर पर नीट पेपर लीक विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आगे भी जारी रहेगा। इस बीच विभिन्न राजनीतिक नेताओं और प्रदर्शनकारी संगठनों ने भी अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
जंतर-मंतर पर इस्तीफे की खबर के बाद जश्न
इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने खुशी जाहिर की। छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी और छात्र एकता के समर्थन में नारे लगाए। कई प्रदर्शनकारी इसे अपने लंबे आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं।
इस दौरान आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका उद्देश्य केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना है।
अभिजीत दीपके ने रखीं दो नई मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के इस फैसले के बाद भी आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें अभी बाकी हैं—
- जिन छात्रों ने कथित तौर पर पेपर लीक विवाद के कारण अपनी जान गंवाई, उनके परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
- प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं तथा पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो।
दीपके ने अपने संबोधन में कहा कि- लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए।
पिछले पांच दिनों में आंदोलन का पूरा घटनाक्रम
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान पिछले कुछ दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आईं।
24 जुलाई: सरकार और CJP के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। इसी दिन सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया।
23 जुलाई: कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से जंतर-मंतर पहुंचकर बातचीत करने की मांग की।
22 जुलाई: सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार से भरोसेमंद आश्वासन मिलेगा तो वे अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
21 जुलाई: अभिजीत दीपके ने कहा कि बातचीत के लिए सरकार को स्वयं जंतर-मंतर आना चाहिए।
20 जुलाई: संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प
आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स हटाने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित अधिकारियों द्वारा की जानी बाकी है।
अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं की आवाज सुनें।
उन्होंने कहा कि- भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
पुलिस का बयान
दिल्ली पुलिस ने कहा कि- सोशल मीडिया पर कथित फेक न्यूज फैलाने वाले 400 से अधिक अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि गलत जानकारी फैलाने वाले खातों को ब्लॉक किया गया है ताकि अफवाहों को रोका जा सके।
पुलिस ने लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेने की अपील भी की।
आंदोलन की आगे की दिशा
प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि आंदोलन फिलहाल समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि जब तक उनकी अन्य मांगों पर भी सरकार स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच फिर से बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर के छात्र, शिक्षा विशेषज्ञ और राजनीतिक दल लगातार नजर बनाए हुए हैं।














