उमाकांत त्रिपाठी।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए जाने वाले प्रधानमंत्री के भाषणों की एक अलग ही अहमीयत होती है. लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के भाषण को सारा देश ध्यान से सुनता है. भला सुने भी क्यों न… इस भाषण के जरिये प्रधानमंत्री देशवासियों को संदेश देने के साथ-साथ अपना विजन भी पेश करते हैं. ऐसे में अगर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा और राजीव गांधी तक के भाषणों की तुलना अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से करें तो फर्क साफ नजर आता है.
जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के भाषणों के विश्लेषण से पता चलता है कि इन दोनों जहां औसतन 15 और 25 मिनट में अपने भाषण निपटा दिए, वहीं पीएम मोदी ने 1 घंटे से ज्यादा समय दिया. ऐसा प्रतीत होता है कि देश जब गरीबी, बेरोजगारी, कृषि और शिक्षा जैसे मुद्दों से जूझ रहा था, तब नेहरू और इंदिरा ने भाषणों को महज औपचारिकता मानकर कम समय दिया.
जानें- नेहरू-इंदिरा के भाषण
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के भाषणों पर गौर करें तो उन्होंने 1954 में 14 मिनट, 1959 में 18 मिनट और 1962 में 16 मिनट का भाषण दिया. वहीं इंदिरा गांधी ने 1966 में 14 मिनट, 1971 में 25 मिनट और 1973 में 25 मिनट का समय लिया. राजीव गांधी ने 1985 में 31 मिनट का भाषण दिया.ऐसा प्रतीत होता है कि- देश जब नया-नया आजाद हुआ था और गरीबी, रोजगार, कृषि, युवा कौशल और शिक्षा जैसे मुद्दों से जूझ रहा था, तब नेहरू और इंदिरा ने भाषणों को महज औपचारिकता माना. नेहरू ने कभी-कभी मात्र 15 मिनट में भाषण समाप्त कर दिया, जबकि इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड भी इससे बेहतर नहीं थीं.नेहरू और इंदिरा का कुल भाषण समय पीएम मोदी से काफी कम है. पंडित नेहरू की औसत अवधि 16 मिनट थी, जबकि इंदिरा की 21 मिनट. राष्ट्र को दिशा, प्रेरणा और नेतृत्व की जरूरत थी, लेकिन नेहरू परिवार ने 15 अगस्त के भाषणों को जल्दी निपटाने की औपचारिकता मानी.
जानिए-मोदी के भाषण: 1 घंटे से ज्यादा समय के
पीएम मोदी के भाषणों को देखें तो उनके भाषण औसतन 86 मिनट लंबे रहे हैं, जो नेहरू और इंदिरा से कई गुना ज्यादा है. प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों में पिछले साल की उपलब्धियां, भविष्य की योजनाएं और युवाओं को प्रेरित करने का विस्तृत एजेंडा होता है. पीएम मोदी ने मध्यम वर्ग को राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बताया और व्यवसायियों को धन सृजनकर्ता कहा.












