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अमेरिका ने ईरान पर किया अब तक का सबसे बड़ा हमला, 5 शहरों पर बरसाए ताबड़तोड़ बम, लगातार 11वीं रात हमला

US Iran Air Strikes: खबर इंडिया की। US Iran Air Strikes को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। सीजफायर टूटने के बाद अमेरिका ने लगातार 11वीं रात ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। ईरानी अधिकारियों के अनुसार बुधवार तड़के अमेरिका ने चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह समेत पांच शहरों को निशाना बनाया। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन पर “बहुत जल्द और बहुत भारी” हमले की चेतावनी दी है। ट्रम्प के इस बयान के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि यदि हमले जारी रहे तो पूरे क्षेत्र में युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है।

लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजार, तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अमेरिका ने पांच शहरों पर की एयर और मिसाइल स्ट्राइक

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका ने बुधवार तड़के एक साथ पांच शहरों में एयर और मिसाइल हमले किए। इनमें चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह शामिल हैं। इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है।

अमेरिका की ओर से इन हमलों पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा।

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि सैन्य अभियान जारी रहा तो उसका जवाब और अधिक व्यापक होगा।

ट्रम्प की नई चेतावनी और बढ़ा तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन पर जल्द ही “बहुत भारी हमला” कर सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु क्षमता हासिल नहीं करने देगा।

ईरान ने ट्रम्प की इस चेतावनी को उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। तेहरान का कहना है कि- यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो उसका जवाब केवल सीमित सैन्य कार्रवाई तक नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में संघर्ष का विस्तार हो सकता है।

युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर पहुंचा

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जानकारी दी कि अब तक इस युद्ध पर अमेरिका लगभग 37.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।

उन्होंने कहा कि सैन्य अभियान जारी है और अमेरिकी सेना अपने सभी रणनीतिक लक्ष्यों पर लगातार काम कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका कूटनीतिक विकल्पों को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा।

भारत और चीन के तेल टैंकरों ने बदला रास्ता

युद्ध का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत और चीन की ओर जा रहे दो बड़े टैंकरों ने रेड सी में अपना रास्ता बदल दिया।

हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद दोनों जहाज यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की ओर लौट गए। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं और तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

पेंटागन ने माना- 100 अमेरिकी सैनिक घायल

पेंटागन ने स्वीकार किया है कि 7 जुलाई के बाद ईरानी हमलों में लगभग 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।

हालांकि- अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार इनमें से करीब 96 प्रतिशत सैनिक इलाज के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं। इससे पहले अमेरिका लगातार सैनिकों के नुकसान को लेकर सीमित जानकारी ही साझा कर रहा था।

कतर ने ईरान से मांगा मुआवजा

कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर हालिया हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।

कतर ने अपने पत्र में कहा है कि ईरान द्वारा किए गए हमलों से हुए नुकसान की पूरी भरपाई की जानी चाहिए और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए।

ट्रम्प ने माना- जॉर्डन में सफल रहा ईरानी हमला

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वीकार किया कि जॉर्डन में ईरान का एक हमला सफल रहा था।

इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है।

 ईरानी गृह मंत्री पहुंचे पाकिस्तान

ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ भी क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा हालात पर चर्चा की।

विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और बदलते सुरक्षा समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

 होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का सख्त रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अब भी ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि- ईरान वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और यह तय करना चाहता है कि कौन-सा जहाज इस जलमार्ग से गुजर सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित कर सकता है।

जॉर्डन ने चार मिसाइलें हवा में मार गिराईं

जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार ईरान ने देश की ओर छह मिसाइलें दागीं।

जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से चार मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें दूरस्थ निर्जन क्षेत्रों में गिरीं।

जॉर्डन की सेना ने कहा कि इस घटना में किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

आगे क्या?

लगातार US Iran Air Strikes और ईरान की जवाबी चेतावनियों के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका जहां सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, वहीं ईरान भी पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा। यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन इस पूरे संघर्ष की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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