खबर इंडिया की।Campylobacter Bacteria को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई और गंभीर चेतावनी जारी की है। लंबे समय से चिकन को प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता रहा है, लेकिन अब नई रिसर्च में सामने आया है कि बड़े पैमाने पर हो रही पोल्ट्री फार्मिंग Campylobacter Bacteria के तेजी से फैलने का कारण बन रही है। यह बैक्टीरिया दुनियाभर में डायरिया (दस्त) फैलाने वाले सबसे आम बैक्टीरिया में शामिल है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में इससे होने वाले संक्रमण का इलाज और अधिक कठिन हो सकता है क्योंकि यह एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक (Antibiotic Resistance) बनता जा रहा है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित हुआ है। इसमें 30 देशों के आंकड़ों और हजारों बैक्टीरिया जीनोम का विश्लेषण किया गया है।
Campylobacter Bacteria क्यों बन रहा है चिंता का विषय?
रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक प्रोफेसर सैम शेपर्ड के अनुसार, दुनिया भर में पोल्ट्री उद्योग का तेजी से विस्तार हुआ है। पहले की तुलना में अब बड़े फार्मों में हजारों से लाखों मुर्गियां एक साथ पाली जाती हैं। ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया तेजी से विकसित और फैलते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि Campylobacter Bacteria मुर्गियों की आंतों में आसानी से पनप सकता है। यदि संक्रमित चिकन को अच्छी तरह पकाए बिना खाया जाए या कच्चे चिकन के संपर्क में आए खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो यह बैक्टीरिया इंसानों तक पहुंच सकता है।
रिसर्च के अनुसार, अधपका या ठीक से न पका चिकन खाने से संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि अच्छी तरह पकाने पर यह बैक्टीरिया नष्ट हो जाता है, लेकिन कई लोग पर्याप्त तापमान पर चिकन नहीं पकाते, जिससे संक्रमण का जोखिम बना रहता है।
एंटीबायोटिक रजिस्टेंस बढ़ा रहा है Campylobacter Bacteria
वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि Campylobacter Bacteria अब कई एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहा है। यानी पहले जिन दवाओं से इसका इलाज संभव था, वे अब कई मामलों में प्रभावी नहीं रह गई हैं।
यदि संक्रमण गंभीर हो जाए तो मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे मामलों में एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, लेकिन बढ़ती एंटीबायोटिक रजिस्टेंस भविष्य में इलाज को चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एंटीबायोटिक का अनियंत्रित उपयोग जारी रहा तो आने वाले वर्षों में यह बैक्टीरिया और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है।
30 देशों की स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने वर्ष 1979 से 2024 के बीच 30 देशों से एकत्र किए गए लगभग 2,800 बैक्टीरिया जीनोम का अध्ययन किया।
अध्ययन में पाया गया कि वर्ष 1900 के बाद से मुर्गियों में पाए जाने वाले Campylobacter Bacteria के स्ट्रेन लगभग 100 गुना तक बढ़ चुके हैं।
रिसर्च के मुताबिक, जहां अत्यधिक संख्या में मुर्गियों का पालन किया जाता है, वहां यह बैक्टीरिया तेजी से फैलता है। ऐसे पोल्ट्री फार्म संक्रमण के बड़े केंद्र बन सकते हैं और वहां से यह इंसानों तक भी पहुंच सकता है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि पोल्ट्री फार्मिंग में स्वच्छता, जैव सुरक्षा (Biosecurity) और निगरानी के बेहतर उपाय नहीं अपनाए गए तो आने वाले समय में संक्रमण के मामले और बढ़ सकते हैं।
Campylobacter Bacteria से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?
संक्रमित चिकन के सेवन के बाद Campylobacter Bacteria इंसान की आंतों में पहुंच सकता है। इसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं—
- डायरिया (दस्त)
- पेट में तेज दर्द
- बुखार
- उल्टी या मतली
- इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS)
- गंभीर मामलों में डिहाइड्रेशन
अधिकांश मरीज बिना विशेष इलाज के कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में संक्रमण गंभीर हो सकता है।
संक्रमण से कैसे बचें?
विशेषज्ञों का कहना है कि- कुछ सावधानियां अपनाकर Campylobacter Bacteria से बचा जा सकता है।
- चिकन को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
- कच्चे चिकन और अन्य खाद्य पदार्थों को अलग रखें।
- खाना बनाने से पहले और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएं।
- कच्चे चिकन के संपर्क में आए बर्तन और चाकू को तुरंत साफ करें।
- पोल्ट्री उत्पाद केवल विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदें।
- अधपका या कच्चा चिकन खाने से बचें।
वैज्ञानिकों ने क्या दी सलाह?
रिसर्च टीम का कहना है कि केवल उपभोक्ताओं को ही नहीं बल्कि पोल्ट्री उद्योग को भी अपनी उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव करना होगा। फार्मों में स्वच्छता बढ़ाने, एंटीबायोटिक के अनावश्यक उपयोग को रोकने और नियमित निगरानी से Campylobacter Bacteria के प्रसार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह बैक्टीरिया वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।














