उमाकांत त्रिपाठी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कॉलेजों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लेखकों की किताबें शामिल करने के राज्य सरकार के फैसले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न लेखकों की किताबें पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए काम कर रही है।
सीएम यादव ने शुक्रवार को राज्य की राजधानी भोपाल में माधवराव सप्रे संग्रहालय में आयोजित ‘भारतीय भाषा महोत्सव’ में हिस्सा लेने के बाद ये बड़ा बयान दिया।
भोपाल के माधवराव सप्रे संग्रहालय में आयोजित ‘भारतीय भाषा महोत्सव’ में शामिल होकर मुझे बहुत अच्छा लगा। हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा है, लेकिन देश में बोली जाने वाली सभी भाषाओं का सम्मान किया जाता है। हमें सभी भाषाओं का परस्पर सम्मान करना चाहिए और इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) लागू की, जिसके तहत हर कोई अपनी क्षेत्रीय भाषा पढ़ सकता है। मैं महोत्सव की शुभकामनाएं देता हूं। “पाठ्यक्रम में बदलाव की एक अलग प्रक्रिया है, इसके लिए एक अलग समिति है और पाठ्यक्रम में बदलाव समिति की सिफारिशों के आधार पर होगा। हाल ही में लिए गए फैसले में किताबों को पुस्तकालयों में रखने और किताबों की खरीद के स्थान के बारे में बताया गया है। अगर कोई इसे गलत अर्थ में लेता है, तो ले। हम इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट हैं कि सभी प्रकार की किताबें वहां होनी चाहिए।” इस बीच, सीएम यादव ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार-हत्या मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना भी साधा
आरएसएस नेताओं की किताबों पर ये बोले
सीएम यादव ने संवाददाताओं से कहा। कॉलेजों में आरएसएस नेताओं द्वारा लिखी गई पुस्तकों को शामिल करने के राज्य सरकार के फैसले पर सीएम ने कहा, “राज्य के उत्कृष्ट कॉलेजों में लाइब्रेरी खोली गई हैं और उनमें अलग-अलग किताबें रखी गई हैं। साथ ही, अलग-अलग लेखकों की किताबें खरीदकर रखने के आदेश भी जारी किए गए हैं। अलग-अलग भाषाओं की किताबें होनी चाहिए, चाहे लेखक कोई भी हों, वे अच्छे लेखक हैं। सरकार अलग-अलग लेखकों की किताबें पढ़ने की आदत बढ़ाने के लिए काम कर रही है।














