दुनियान्यूज़भारतराजनीतिहेडलाइंस

पाकिस्तान को करारा जवाब, पीएम मोदी की युद्धनीति के मुरीद हुए चिदंबरम, तारीफ में कही ये बात

उमाकांत त्रिपाठी।बीते 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले का भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए करारा जवाब दे दिया है। भारत सरकार पर बदला लेने का दबाव था। लेकिन, भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की संभावना कम थी। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कहा था, ‘यह युद्ध का युग नहीं है। इस बयान की पूरी दुनिया में सराहना हुई थी। भारत ने सोच-समझकर सैन्य कार्रवाई की और पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।

पाकिस्तान से हुए सीजफायर के बीच अब पीएम मोदी की नीतियों की जमकर तारीफ हो रही है। कांग्रेस नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने भी पीएम मोदी की युद्ध नीति की तारीफ की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हस्तक्षेप किया था। 16 सितंबर, 2022 को उन्होंने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘यह युद्ध का युग नहीं है।’ मोदी के इस बयान की पूरी दुनिया में तारीफ हुई थी। भारत में उन्हें एक महान नेता और शांतिदूत माना गया. कई देशों ने भारत को युद्ध से बचने की सलाह दी। युद्ध न करने के कई कारण थे।

पहला, रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास युद्ध से अलग, भारत और पाकिस्तान दोनों के पास परमाणु हथियार हैं। दूसरा, दुनिया अब युद्ध को बर्दाश्त नहीं कर सकती। यूक्रेन में 13,000 और गाजा में 50,000 लोग मारे जा चुके हैं। रूस और इजरायल में भी सैकड़ों लोग मारे गए हैं। दो परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सकता था।

चिदंबरम ने की पीएम मोदी की तारीफ
चिदंबरम ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन बातों को समझा। उन्होंने सोच-समझकर सीमित सैन्य कार्रवाई का फैसला किया। 7 मई, 2025 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। माना जाता है कि इन हमलों में आतंकवादी समूहों के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया गया। यह कार्रवाई सीमित थी और इसका मकसद पूरा हो गया। यह एक पीड़ित देश का उचित जवाब था।

अगर पाकिस्तान युद्ध शुरू करता…
भारत ने नागरिकों और उनकी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया। भारत ने पाकिस्तान की सेना को भी निशाना नहीं बनाया। पाकिस्तान ने LoC पर फायरिंग करके जवाब दिया। अगर पाकिस्तान युद्ध शुरू करता, तो उसे इस्लामिक देशों के संगठन (OIC) सहित कई देशों की आलोचना का सामना करना पड़ता।

‘पाकिस्तान की सेना चुप बैठेगी, सोचना गलत’
यह सोचना गलत होगा कि पाकिस्तान की सेना चुप बैठेगी। वे आने वाले दिनों में और भी हमले कर सकते हैं। यह भी मानना गलत है कि 7 मई के हमले में सभी आतंकवादी संगठन खत्म हो गए। टीआरएफ, लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के नेता अभी भी जिंदा हैं। वे नए नेताओं को तैयार कर सकते हैं। पाकिस्तान में कई युवा हैं जो भारत में आतंकवादी हमले करने के लिए तैयार हैं। जब तक पाकिस्तान की सेना और ISI का नियंत्रण रहेगा, तब तक भारत पर खतरा बना रहेगा।

‘भारत को कुछ सैन्य उपकरणों का नुकसान हुआ हो’
किसी भी युद्ध में नुकसान होना तय है। भारत सरकार ने माना है कि सीमा पर गोलीबारी में कुछ भारतीय नागरिक मारे गए हैं। यह भी संभव है कि भारत को कुछ सैन्य उपकरणों का नुकसान हुआ हो। पाकिस्तान ने विमानों को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री BBC को कोई सबूत नहीं दे पाए। अगर सीमा पर गोलीबारी बढ़ती है, तो भारत को और भी नुकसान हो सकता है। युद्ध बहुत क्रूर होता है। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कश्मीर में तीन बड़े आतंकवादी हमले हुए हैं- उरी, पुलवामा और पहलगाम। हर हमले के बाद सरकार ने सावधानी से जवाब दिया। अब सरकार खुलकर बात कर रही है। 7 मई के हमले के बाद सरकार ने नक्शे और वीडियो जारी किए। सरकार ने सेना और वायु सेना की दो युवा महिला अधिकारियों को मीडिया से बात करने के लिए भेजा।

उन्होंने पीड़ितों के परिवारों से भी मुलाकात नहीं की
लेकिन, प्रधानमंत्री 24 अप्रैल और 7 मई को हुई सर्वदलीय बैठकों में शामिल नहीं हुए। उन्होंने पहलगाम हमले के बाद कश्मीर का दौरा भी नहीं किया। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों से भी मुलाकात नहीं की। लोगों ने इसकी तुलना मणिपुर की घटना से की है, जहां वे 3 मई, 2023 से नहीं गए हैं। 8 मई को पाकिस्तान ने भी मिसाइलों, ड्रोन और विमानों से हमला किया, भारत ने जवाबी कार्रवाई की और पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया। भारत ने कहा कि यह कार्रवाई सीमित थी, लेकिन पाकिस्तान ने इसे अलग तरह से देखा।

पाकिस्तान में कौन फैसला लेता है?
भारत ने पाकिस्तान को मुश्किल में डाल दिया है। भारत ने संकेत दिया है कि अगर पाकिस्तान युद्ध चाहता है, तो वह तैयार है। पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह पहलगाम की घटना को भूल जाए, आतंकवादियों को रोके और भारत के साथ शांति बनाए रखे। लेकिन, सवाल यह है कि पाकिस्तान में कौन फैसला लेता है? क्या यह शहबाज शरीफ की सरकार है या पाकिस्तान की सेना और ISI?आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। सीमा पर तनाव बढ़ सकता है, युद्ध की चेतावनी जारी हो सकती है, गोलीबारी बढ़ सकती है और सैनिक और नागरिक मारे जा सकते हैं।

What's your reaction?

Related Posts

11 साल छोटे लड़के से प्यार, फिर नाबालिग BF को भगा ले गई महिला, घर वापस लौटी तो लड़के मां बोली-बहू तो बनेगी लेकिन…

उमाकांत त्रिपाठी। राजधानी भोपाल के गौतम नगर क्षेत्र में रहने वाले ग्यारह साल…

एशिया कप से मिलने वाली पूरी फीस इंडियन आर्मी को देंगे सूर्यकुमार यादव, जानिए कितनी है उनकी मैच फीस.?

खबर इंडिया की।सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने एशिया कप 2025 में…

1 of 592

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *